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Delhi Police vs Lawyers

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एक वकील पुलिस वैन के बगल में अपनी कार लगा देता है. बाद में एक पुलिसकर्मी उसके पास जाता है और वहां से कार हटाने को कहता है. दोनों के बीच पहले बहस होती है और फिर हाथापाई. इसके बाद पुलिसवाला वकील को लॉकअप में डाल देता है. हालांकि वहां उससे किसी तरह की मारपीट नहीं होती है. कुछ देर बाद वकील को लॉकअप से छोड़ दिया जाता है और वो वहां से चला जाता है. कुछ देर बाद वकील अपने साथी वकीलों के साथ पुलिस के पास पहुंचता है और मारपीट की शुरुआत होती है. इस बीच शनिवार को तीस हज़ारी कोर्ट में हुई हिंसा का नया सीसीटीवी फ़ुटेज सामने आया है. नए वीडियो में झगड़े की शुरुआत की पूरी कहानी है. 
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दिल्ली पुलिस vs वकील :
ये क्या हो रहा हैं इस देश मे।
क्यों कानून के रखवाले ओर कानून के ज्ञाता ही । एक दूसरे के दुश्मन बने 
क्यों हमारी सरकार इतनी बड़ी बात पर भी मौन हैं।
आखित कब तक ये कैंडल मार्च होते रहेंगे।
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नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच तकरार चौथे दिन थम गई। दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सतीश गोलचा ने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से कहा- मैं आप सभी से निवेदन करता हूं कि कृपया अपनी ड्यूटी पर लौट जाएं। तीस हजारी कोर्ट में हुई हिंसक घटना में जितने पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, उन्हें कम से कम 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाएगा। इसके बाद एक पुलिसकर्मी ने कहा- अधिकारियों से आश्वासन मिलने के बाद हमने धरना खत्म करने का निर्णय लिया है।
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इससे पहले गृह मंत्रालय ने मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका लगाई, जिसमें 3 नवंबर के कोर्ट के आदेश को संशोधित करने की मांग की गई। गृह मंत्रालय का कहना है कि 2 नवंबर को तीस हजारी कोर्ट में वकील और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद की घटनाओं पर यह आदेश लागू न किया जाए। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को वकीलों के खिलाफ सख्ती न बरतने का आदेश दिया था। गृह मंत्रालय की याचिका पर अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) समेत वकीलों के दूसरे संगठनों को नोटिस जारी किया। इस मामले पर बुधवार को सुनवाई होगी।
पुलिसकर्मियों ने आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन किया
इससे पहले साकेत और तीस हजारी कोर्ट में साथियों से मारपीट के विरोध में मंगलवार को पुलिसकर्मियों ने आईटीओ स्थित पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने हाथों में जो पोस्टर लिए थे, उनमें लिखा था कि यहां कमजोर नेतृत्व नहीं, बल्कि किरण बेदी की जरूरत है। पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने पुलिसकर्मियों से काम पर वापस लौटने की अपील की और कहा कि यह हमारे लिए परीक्षा की घड़ी है।
आपकी मांगें मान ली जाएंगी: जॉइंट कमिश्नर
दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर देवेश श्रीवास्तव ने कहा- आप सभी की मांगें मान ली जाएंगी। साकेत और तीस हजारी कोर्ट मामले में संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रदर्शन में जितने भी कर्मचारी शामिल थे, उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पुलिसकर्मियों के बयान पर 2 एफआईआर दर्ज
इस बीच, साकेत कोर्ट में मारपीट के मामले में पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर 2 एफआईआर दर्ज की गई हैं। उधर, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रदर्शन कर रहे वकीलों से काम पर वापस लौटने की अपील की है। बार काउंसिल ने कहा कि गुंडागर्दी करने वाले वकीलों की पहचान की जाए। तीस हजारी कोर्ट में 2 नवंबर को और 4 नवंबर को साकेत कोर्ट और कड़कड़डूमा कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच झड़प हुई थी। इसमें करीब 20 पुलिसकर्मी और कुछ वकील घायल हुए थे।
हम कानून के रखवाले, व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी है- पुलिस कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर पटनायक ने कहा, "दिल्ली पुलिस हमेशा से चुनौतियां देखती आई है। हम हर परिस्थिति को हैंडल करते हैं। हम कानून के रखवाले हैं और इस व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी हमारी है। न्यायिक जांच हो रही है, इसलिए उम्मीद करता हूं कि साकेत कोर्ट और अन्य जगहों पर जो भी घटनाएं हुई हैं, इन्हें हम देखेंगे। न्यायिक जांच में भी कुछ निष्कर्ष निकलेगा। इसलिए धैर्य रखें और ड्यूटी पर वापस जाएं।"
वकीलों के प्रदर्शन से संस्थान का नाम खराब हो रहा- बीसीआई
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि वकील अपना प्रदर्शन छोड़कर काम पर वापस लौटें। इस तरह के प्रदर्शन से संस्थान का नाम खराब हो रहा है। संस्थान की छवि को दागदार करने वालों को हटाया जाए। यह बार काउंसिलों की सहनशीलता और अकर्मण्यता है, जो इस तरह के वकीलों को बढ़ावा दे रही है। पुलिसवालों से मारपीट जैसी घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और हम इसे सहन नहीं करेंगे।
रिजिजू ने ट्वीट किया- पुलिसवाला होना थैंकलेस जॉब
रिजिजू ने पुलिस के समर्थन में ट्वीट किया, लेकिन कुछ ही देर में उसे डिलीट भी कर दिया। उन्होंने लिखा- पुलिस इसलिए काम नहीं करती है कि कोई उन्हें धन्यवाद दे। यह एक थैंकलेस जॉब है। अगर पुलिसवाले ऐसा करते हैं तो उनकी निंदा होगी। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो भी निंदा होगी।
तीस हजारी में पार्किंग को लेकर विवाद हुआ था, 2 वकीलों को गोली लगी थी
तीस हजारी कोर्ट के पार्किंग एरिया में पुलिस वैन और वकील की गाड़ी की टक्कर के बाद विवाद शुरू हुआ था। वकीलों ने हवालात में घुसने की कोशिश की थी। इसके बाद हिंसक झड़प हुई और दो वकीलों को गोली लगी थी। 20 पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की न्यायिक जांच, दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड और घायलों के बयान दर्ज करने के निर्देश पुलिस कमिश्नर को दिए थे। 

दिल्ली पुलिस की मांगे :-


दिल्ली पुलिस की मांगे

दिल्ली पुलिस की मांगे

दिल्ली पुलिस की मांगे

दिल्ली पुलिस की मांगे

दिल्ली पुलिस की मांगे



दिल्ली : बड़ी-बड़ी दलीलें देने वाले वकील ही भूले कानून, जगह-जगह कर रहे हैं मारपीट

दिल्ली के तीसहजारी कोर्ट में कार पार्किंग के लेकर वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प और आगजनी की घटना से नाराज वकील अब खुलेआम कानून का उल्लंघन और जगह-जगह लोगों के साथ मारपीट कर रहे हैं.




नई दिल्ली: 
दिल्ली पुलिस की मांगे


तीस हज़ारी कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच हुई हिंसा के मामले में पूरे देश में सोमवार को निचली अदालतों में हड़ताल रही. इस दौरान दिल्ली में वकीलों ने पुलिस, पब्लिक और मीडिया हर किसी के साथ बदसलूकी और मारपीट की. ड्यूटी पर तैनात वर्दी पहने और पेट्रोलिंग कर रहे एक पुलिसकर्मी को साकेत कोर्ट के बाहर न्याय के रखवालों ने बुरी तरह पीटा. जान बचाकर जब पुलिस का जवान बाइक से भागने लगा तो वकीलों ने उसे हेलमेट फेंककर मारा. पिटने के बाद आखिरकार पुलिसकर्मी भागने में कामयाब रहा. साकेत कोर्ट के बाहर एक ऑटो वाले को बेवजह निशाना बनाया गया. वो वकीलों से गुहार लगाता रहा और वकील उसे पीटते रहे. पिटाई से ऑटो वाले के कपड़े भी फट गए. इसी तरह यहां एक और ऑटोवाले को वकीलों ने जमकर पीटा.
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तीस हजारी के अलावा कड़कड़डूमा, साकेत कोर्ट के वकील भी प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के पास वकीलों ने बाइक सवार एक लड़के को बेवजह मारा. उसकी इतनी पिटाई की कि वो अपनी बाइक छोड़कर भाग गया. कई पत्रकारों से बदसलूकी हुई, 2 महिला पत्रकारों को भी नहीं बख्शा गया. ये हिंसा उस हिंसा के विरोध में हुई जो शनिवार को तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुई.
मौका मिलने पर वकील पुलिस, आम जनता और ऑटो चालकों के ऊपर हाथ छोड़ने से भी बाज नहीं आ रहे हैं. अदालत में कानून की बड़ी-बड़ी दलीलें देने वाले वकीलों का यह रूप देखकर हर कोई हैरान है. इस पूरे मामले की शुरुआत शनिवार की दोपहर हुई. करीब 2:30 बजे एक वकील ने जब लॉकअप के बाहर अपनी कार पार्क करनी चाही तो लॉकअप की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी से कार पार्क करने को लेकर उसकी बहस हो गई. इस बहस के बाद वकील ने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिसवाले को पीट दिया. करीब 2:40 बजे लोकल पुलिस को घटना की जानकारी दी गयी.
जानकारी मिलने पर पुलिसवाले इकट्ठा हो गए और देखते-देखते मामला हिंसक मारपीट में बदल गया. करीब पौने 3 बजे पुलिसवाले एक वकील को पीटते हुए अंदर ले आये. उसे छुड़ाने के लिए वकीलों का झुंड लॉकअप में घुस गया और पुलिसवालों को बेरहमी से पीटा. एक पुलिसवाले को बेल्ट से इतना पीटा कि वह बेहोश हो गया. करीब 3:15 बजे उत्तरी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी फ़ोर्स के साथ तीस हज़ारी कोर्ट पहुंचे. वकीलों ने उन्हें भी पीट दिया. वह अपनी जान बचाने के लिए लॉकअप के अंदर चले गए. इसी बीच पुलिस ने कथित तौर पर फायरिंग की. अब वकीलों की मांग है कि दोषी सीनियर पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किया जाए.
सोमवार को पूरे देश में निचली अदालतों के वकील हड़ताल पर थे. वकीलों का कहना है वो गुस्से में इसलिए हैं क्योंकि जिम्मेदार पुलिस अफसरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. रविवार को दिल्ली हाइकोर्ट ने मामले की 6 हफ्ते के अंदर न्यायिक जांच के आदेश दिए थे.
दिल्ली पुलिस का विरोध: हजारों आंदोलनकारियों ने संयुक्त आयुक्त के काम को फिर से शुरू करने की अपील की

डेल्ही ने मंगलवार को एक अनोखा विरोध देखा जब उसके पुलिस कर्मी सड़कों पर उतरे और वकीलों के साथ हालिया झड़पों को लेकर दिल्ली की अदालतों में पुलिस अधिकारियों पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तख्तियों के साथ पुलिस मुख्यालय के सामने बैठ गए।

हजारों पुलिसकर्मियों के साथ कठोर विरोध और दृष्टि में कोई समाधान नहीं होने के कारण, दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त राजेश खुराना अपने प्रदर्शनकारी सहयोगियों को संबोधित करने के लिए मुख्यालय से बाहर आए। लेकिन उनकी आवाज आंदोलनकारी कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा डूब गई, जो न्याय की मांग करते हुए नारे लगाते रहे।
राजेश खुराना ने प्रदर्शनकारी पुलिस बल से आग्रह किया कि वे दिल्ली पुलिस बल से न केवल हजारों पुलिस अधिकारियों के रूप में काम करें, बल्कि पंजाब, हरियाणा और बिहार से भी न्याय मांगने के लिए सेना में शामिल हुए।

खुराना ने कहा, "हम वही हैं जो कानून लागू करते हैं और हमें अपने काम को जारी रखना है।"

उन्होंने आगे कहा, "हम अपने परिवार के साथ जो भी समय बिताते हैं, उसकी तुलना में, पुलिस थानों में, क्षेत्र में दोगुना समय बिताते हैं। हम अपने परिवार के साथ मनाते हैं कोई त्योहार नहीं है।"

साकेत कोर्ट के बाहर अपने सहयोगी पर हमले में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग के लिए हजारों पुलिस कर्मियों ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस के विरोध के अभूतपूर्व दृश्यों ने दिल्ली के पुलिस प्रमुख अमूल्य पटनायक को ड्यूटी फिर से शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

पुलिस कर्मियों और वकीलों के बीच तनाव शनिवार से ही बढ़ रहा था जब पार्किंग विवाद को लेकर झड़प में कम से कम 20 सुरक्षाकर्मी और कई अधिवक्ता घायल हो गए।

आईटीओ में पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा होने के कारण, ट्रैफिक स्नैल्स के लिए पटनायक अपने कार्यालय से बाहर आ गए ताकि उन्हें आश्वासन दिया जा सके कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा।

पटनायक ने पुलिस कर्मियों से कहा, "हमें एक अनुशासित बल की तरह व्यवहार करना होगा। सरकार और लोग हमसे कानून को बनाए रखने की उम्मीद करते हैं। यह हमारी बड़ी जिम्मेदारी है। मैं आपसे फिर से काम शुरू करने का आग्रह करता हूं।"

दिल्ली पुलिस के पूरे शीर्ष अधिकारियों ने उन पुलिस कर्मियों को शांत करने की कोशिश की, जो न्याय की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे और काली पट्टी बांध रहे थे। दिल्ली पुलिस के पास 80,000 से अधिक कर्मियों की ताकत है।

उन्होंने कहा, “दिल्ली पुलिस के लिए चुनौतियां हैं और हम हमेशा विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों को संभालते हैं। हमें कानून और व्यवस्था को यथावत रखना चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि हम इस स्थिति को अच्छी तरह से संभाल लेंगे। ”हालांकि, उन्होंने विरोध करने वाले पुलिसकर्मियों को नहीं छोड़ा क्योंकि उन्होंने काम पर दोबारा जाने से इनकार कर दिया था।

इससे पहले, एक विरोध करने वाली महिला कांस्टेबल ने कहा: “लोगों को इस बात का एहसास नहीं है कि हमें हर दिन किस तरह का खतरा है। अगर हम खुद को नहीं बचा सकते हैं, तो हम दूसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कैसे पूरी करेंगे? हम भी इंसान हैं और हमें सम्मान के साथ पेश आना चाहिए। ”

पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) ईश सिंघल ने प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को आश्वासन दिया कि उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा। सिंघल ने कहा, "आपकी चिंताओं और गुस्से से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि आपका विरोध यहां असफल नहीं होगा।"

घटना का एक वीडियो जिसमें विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया और अब वायरल हो गया है, एक बाइक पर सवार एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारी वकीलों के एक छोटे समूह से भिड़ता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसमें से एक ने अपनी कोहनी से उसे मारा और वह उसके पीछे एक हेलमेट पहने हुए चला गया। अतीत।



तीस हजारी कोर्ट हिंसा: दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से की धरना खत्म करने की अपील, कहा- घायल जवानों के इलाज के लिए देंगे 25 हजार की मदद


नई दिल्ली: 
तीस हज़ारी कोर्ट में शनिवार को वकीलों और पुलिस की झड़प का विवाद थमता नज़र नहीं आ रहा है. आज दिल्ली पुलिस वर्दी में सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन कर रही है. सोमवार को वकीलों ने कामकाज बंद रखा था और इस दौरान उनकी गुंडागर्दी भी सामने आई थी. दिल्ली की अलग-अलग अदालत परिसरों में पुलिस और मीडिया के अलावा आम लोगों के साथ मारपीट की गई थी. इधर बार काउंसिल ने वकीलों से जल्द से जल्द काम पर लौटने की अपील की है. इन सब के बीच आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों के समर्थन में उनके परिजन भी आ गए हैं. पुलिसकर्मियों के परिजन इंडिया गेट पर कैंडल मार्च निकालने के बाद अब पुलिस मुख्यालय पर पुलिस के जवानों के साथ धरना देंगे. इस खबर के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों ने धरना कर रहे पुलिसकर्मियों से बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें इंसाफ मिलेगा. आला अधिकारियों ने धरना कर रहे पुलिसकर्मियों से कहा कि वह इस झड़प में घायल पुलिसकर्मियों का इलाज कराएंगे साथ ही इलाज के लिए 25 हजार रुपये की मदद भी देंगें. अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों से अनुशासन का हवाला भी दिया है. अधिकारियों की इस अपील के बाद अब धरने पर बैठे पुलिसकर्मी धरना खत्म करने पर विचार कर रहे हैं.



इससे पहले पुलिसकर्मी ने पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन के दौरान 'हमें न्याय चाहिए' के नारे लगाए और कहा कि हमें असुरक्षा का एहसास हो रहा है. प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों से दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने मुलाकात की. इस दौरान पुलिस कमिश्नर ने पुलिसकर्मियों से कहा, 'आप सभी शांति बनाए रखें. सरकार और जनता को हमसे उम्मीदें है. हमारे लिए परीक्षा, अपेक्षा और प्रतीक्षा की घड़ी है. आप सभी ड्यूटी पर वापस जाए. इस मसले पर न्यायिक जांच चल रही है. हमें अनुशासन बनाए रखना है. पहले से हालात बेहतर हो रहे हैं












Delhi Police vs Lawyers Delhi Police vs Lawyers Reviewed by Asrog on November 05, 2019 Rating: 5

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